अयोध्या के बाद लक्ष्मण नगरी में रामलला की स्थापना, उद्योगपति महेश पटेल की पहल बनी सामाजिक-सांस्कृतिक संदेश
लखनऊ/अलीगंज। अयोध्या में भव्य राम मंदिर की स्थापना के बाद अब लक्ष्मण नगरी लखनऊ में भी रामभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का नया केंद्र उभरता दिखाई दे रहा है। अलीगंज क्षेत्र स्थित एक मंदिर में उद्योगपति एवं शिक्षाविद महेश पटेल द्वारा रामलला की दिव्य मूर्ति की स्थापना कराई गई। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और नैतिक मूल्यों के संरक्षण का प्रतीक बनकर सामने आया।
रामलला की यह स्थापना उस परंपरा को सशक्त करती है, जिसमें समाज के सक्षम और प्रबुद्ध वर्ग आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर इसे आस्था और संस्कृति से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण बताया।
धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश
महेश पटेल द्वारा कराई गई रामलला की स्थापना भारतीय संस्कृति के उन आदर्शों को दर्शाती है, जो मर्यादा, करुणा, सत्य और कर्तव्यबोध पर आधारित हैं। वर्तमान समय में जब भौतिकता जीवन के केंद्र में आ गई है, तब यह पहल समाज को नैतिक मूल्यों की ओर लौटने का संदेश देती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लक्ष्मण नगरी में रामलला की स्थापना से क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत हुई है और सामाजिक समरसता को भी बल मिला है।
जयपुर की शिल्पकला से सजी रामलला की दिव्य मूर्ति
लक्ष्मण नगरी में स्थापित रामलला की मूर्ति को विशेष बनाता है इसका जयपुर में निर्मित होना। जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई यह मूर्ति भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा और आस्था का जीवंत प्रमाण है। मूर्ति में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ श्रद्धा, भाव और संस्कारों की गहरी छाप दिखाई देती है। जयपुर की कला और लक्ष्मण नगरी की आस्था का यह संगम राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का सुंदर उदाहरण माना जा रहा है।
अयोध्या न जा पाने वालों के लिए दर्शन का अवसर
लक्ष्मण नगरी में रामलला की स्थापना उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है, जो किसी कारणवश अयोध्या नहीं जा पाते। यहां दर्शन कर श्रद्धालु वही भाव, श्रद्धा और आत्मिक शांति अनुभव कर रहे हैं, जो अयोध्या से जुड़ी है। यह पहल आस्था को आम जनमानस के और निकट लाने का संवेदनशील प्रयास मानी जा रही है।

उद्योग, शिक्षा और सेवा में पहचान
उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके महेश पटेल का मानना है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भी होना चाहिए। उनकी यह सोच रामलला की स्थापना के माध्यम से स्पष्ट रूप से सामने आई है।

कन्नौज से संघर्ष का सफर
महेश पटेल का जन्म कन्नौज के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े महेश पटेल ने परिश्रम, अनुशासन और सादगी को जीवन का आधार बनाया। वर्ष 1992 में उनका विवाह अनीता सिंह से हुआ। उनका परिवार एक पुत्र और दो पुत्रियों से संपन्न है। पत्नी अनीता सिंह धार्मिक प्रवृत्ति की साधारण गृहिणी हैं।
कोरोना काल में समाजसेवा की मिसाल
कोरोना महामारी के दौरान महेश पटेल ने जरूरतमंदों के लिए राशन, भोजन, दवाइयों और ऑक्सीजन जैसी सुविधाओं की व्यवस्था कर समाजसेवा की मिसाल पेश की। कई असहाय परिवारों की आर्थिक मदद कर उन्होंने यह साबित किया कि संकट के समय मानवता सबसे बड़ा धर्म है।
हर बड़े मंगल पर भंडारा, सेवा की निरंतर परंपरा
महेश पटेल ज्येष्ठ माह के प्रत्येक बड़े मंगल पर भंडारे का आयोजन करते हैं। श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए निःशुल्क भोजन-पानी की व्यवस्था उनकी सेवा भावना को दर्शाती है। यह आयोजन वर्षों से निरंतर होते आ रहे हैं।

बाल रामलला स्थापना पर विशाल भंडारा
अलीगंज में बाल रामलला मंदिर की स्थापना के अवसर पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों रामभक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। भक्तों में इतना उत्साह देखने को मिला कि सुबह से देर रात तक प्रसाद वितरण चलता रहा।
आस्था का नया केंद्र बनती लक्ष्मण नगरी
लक्ष्मण नगरी में रामलला की स्थापना ने यह सिद्ध कर दिया है कि राम किसी एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि जन-जन की भावना में विराजमान हैं। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है।
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